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दोस्तों आपने हमारी भारतीय संस्कृति में गुरुकुल के बारे में तो जरुर सुना होगा। खैर …. आजकल तो स्कूल्स का जमाना है, लेकिन भारत में एक समय हुआ करता था जब शिक्षा गुरुकुल में मिला करती थी। बच्चों को अपना घर द्वार छोड़ कर जाना पड़ता था, लेकिन आजकल तो सारी शिक्षा आपकी जेब में पड़े मोबाइल तक आ गई है।

मेरे दादा जी नें बहुत पहले मुझे संस्कृत का एक श्लोक बताया था जोकि विद्यार्थी और उसके जीवन को बहुत अच्छी तरह से परिभाषित करता है।

काकचेष्टा बकोध्यानं श्वाननिद्रा तथैव च।
अल्पहारी गृहत्यागी विद्यार्थी पंचलक्षणम्॥

यहाँ पर ग्रहत्यागी विद्यार्थी के पांच लक्षणों में से एक है। लेकिन यहाँ पर हम एक अलग दिशा में आपका ध्यान केन्द्रित करना चाहेंगे कि उस समय में गुरुकुल में जो गुरु शिक्षा देते थे, उनकी कोई फीस नहीं होती थी।

गुरु दक्षिणा के नाम पर उन्हें जो भी मिल जाता वो उसी में गुज़ारा कर लिया करते थे। हालांकि हमारे सामने उदहारण हैं कि गुरु दक्षिणा के नाम पर कठोर से कठोर और कीमती चीजें भी गुरु माँगा करते थे, लेकिन ये चाँद ही उदहारण हैं। हर गुरु ऐसा नहीं करते थे।

अब तो जमाना बदल गया है, अब न गुरुकुल रहे और ना ही गुरु। अब तो स्कूल और कॉलेज हो गये हैं और इनमे पढ़ने वाले प्रोफेसर हो गये हैं। हजारों और लाखो की तनख्वाह मिलती है।

पर ये सही भी है, जैसे जैसे जमाना बदला है वैसे हमारी शिक्षा प्रणाली भी बदली है। सबको जमाने के साथ बदलना पड़ता है।

पहले जो गुरु और शिष्य हुआ करते थे, उनका गुज़ारा भिक्षा और दान दी हुई चीजों से हुआ करता था। लेकिन अब सब कुछ बदल गया है।

लेकिन दोस्तों आज भी कुछ लोग हैं जो उन्हीं गुरुकुल के गुरु जैसे हैं। हाँ . . . मैं मानता हूँ कि जमाना बदल गया है, लेकिन कुछ लोग आज भी शिक्षा को उसी स्तर पर रखना चाहते हैं। मैं किसी और की बात नहीं करूंगा, मैं बस अपनी बात कहूँ तो में एक मैकेनिकल इंजिनियर ग्रेजुएट हूँ। लेकिन मुझे अंतरिक्ष विज्ञानं में शुरू से ही रूचि थी और मैं ग्रेजुएशन के 2nd इयर से ही Youtube पर अंतरिक्ष विज्ञानं से सम्बंधित विडियो बनाने लग गया था।

Science Background से होने के चलते मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई और मैं आगे बढ़ता गया। मेरा भी यही मन्ना है कि शिक्षा एक शिष्य के लिए मुफ्त होनी चाहिए। शिक्षा और शिष्य के बीच कोई आर्थिक दीवार नहीं होनी चाहिए। और इसके लिए youtube मुझे एक बेहतर प्लेटफार्म लगा।

हाँ ये बात भी उतनी ही सच है कि Youtube पर कमाई होती है, लेकिन ये किसी नौकरी से बिलकुल अलग है। यहाँ कुछ भी एक सामान नही रहता। मैं अपनी बात करूं तो कभी कभी Youtube से 15 से 20 हज़ार रूपए आ जाते हैं तो कभी कभी 3 से 4 हज़ार ही हो पाते हैं। लेकिन हमारे खर्चे उतने ही बने रहते हैं।

मैं यहाँ पर आपको खर्चे नहीं गिनाऊंगा। लेकिन आप सोचिये कि आप तक हम जो भी ज्ञान पहुंचाते हैं उसका आर्थिक बोझ भी हम पर पड़ता है, मै स्वयं चाहता हूँ की मैं ये काम ताउम्र करता रहूँ। पर जितना मेहरबान youtube हम पर है उस से जिम्मेवारियां भी पूरी नहीं होती।

एक और बात है कि पढ़ाई से सम्बंधित विडियो लोग कम ही देखना पसंद करते हैं। और शायद यही वजह है कि एजुकेशनल youtube चैनल पर कम ऑडियंस रहती है। खैर . . . ये सब की पर्सनल चॉइस होती है।

हमें भी अपना काम ज़ारी रखने के लिए हिम्मत और मोटिवेशन चाहिए होता है और बस यहीं पर मुझे आपके सहयोग और सपोर्ट की जरूरत है। मुझे भी उसी गुरु दक्षिणा या भिक्षा की जरूरत है जिस से हमारा Youtube Channel रुपी ये गुरुकुल चलता रहे। मुझे मालूम है कि आप अभी स्कूल में पढ़ते हो या कॉलेज में।

आपके पास अभी शायद इतने पैसे न हों कि आप हमारी सहायता कर पायें, लेकिन आप हमारी वीडियोस को शेयर और चैनल को सब्सक्राइब करके हमारी मदद कर सकते हैं।

लेकिन जो सक्षम हैं और हमारी सहायता कर सकते हैं। वो कृपया हमारी सहायता जरुर करें। ताकि हम निश्चिंत होकर अपना ध्यान आपको बेहतर विडियो देने में लगायें।

मैंने आपसे मिलने वाली मदद और सहायता को भिक्षा/ गुरुदक्षिणा कह दिया है लेकिन मैं देखता हूँ की आज इसके मायने भी बदल गये हैं। आजकल लोग इसे डोनेशन, Superchat, Membership भी कहने लगे हैं।

मैं दूसरे बड़े बड़े चैनल्स पर देखता हूँ तो अच्छा लगता है की लोग दिल से देते हैं अगर उन्हें किसी का कंटेंट पसंद आता है तो। इसलिए मुझे लगता है कि मेरे आप सब मुझे भी जरुर सपोर्ट करोगे।

अगर आप मेरा काम देखना चाहते हैं तो आप Documentry Library पर मेरी विडियो देख सकते हैं। अगर आप मेरे बारे में और जानना चाहते हैं तो आप मेरे बारे में पढ़ सकते हैं।

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